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कैसा जी यह लोकतंत्र है

Posted On: 31 May, 2012 Others में

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कैसा जी यह लोकतंत्र है
कैसा इसका मोह-मंत्र है
हमको तो लगता है जैसे
कुछ लोगों के लिए खून
पीने का, सबसे सफल यन्त्र है
मेरी खातिर सोगतंत्र है
भैया का यह लोभतंत्र है
भौजी का यह नेहतंत्र है
अम्मा औ बाबू की खातिर
दमाग्रस्त यह रोगतंत्र है
नेता-नूती कहते हैं सब
खूब अच्छा है, वोटतंत्र है
कांग्रेस का नोटतंत्र है
राजा का उद्योगतंत्र है
कलमाड़ी का खेलतंत्र है
नीराओं का मेलतंत्र है
धनकुबेर, अम्बानीयों का
पैसा पेलमपेलतंत्र है
मनमोहन का मोहतंत्र है
चैनल पर निर्मलवा बोला-
मेरा अपना खोजतंत्र है
रथ पर चढ़ अडवाणी बोले-
नहीं, नहीं यह रामतंत्र है
एनडी बाबू हंसकर बोले-
सत्तासुख औ कामतंत्र है
चिदंबरम मुस्काते गुज़रे
मेरे लाला, रक्ततंत्र है
राहुल भैया कांप रहे हैं-
क्यों कहते हो राजतन्त्र है
अम्मी दस जनपथ से बोलीं-
राहुल का कल्याण तंत्र है
दिग्गी कुटिल हंसी हंस बोले-
कांग्रेस का लालतंत्र है
हरिद्वार से बाबा बोले-
शैतानों का दुष्टतंत्र है
रालेगण से अन्ना बोले-
सब का सब यह भ्रष्टतंत्र है
चुनही मलते निरहू बोला-
मैकाले का षड्डयन्त्र है
मेरे खातिर सब कुतंत्र है.

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaishree Verma के द्वारा
June 26, 2013

कैसा जी यह लोकतंत्र है कैसा इसका मोह-मंत्र है कांग्रेस का नोटतंत्र है राजा का उद्योगतंत्र है कलमाड़ी का खेलतंत्र है नीराओं का मेलतंत्र है अच्छी लाइनें !कृष्णकांत जी ! बधाई !

    krishnakant के द्वारा
    July 27, 2013

    शुक्रिया जयश्री जी…

santkumarsharma के द्वारा
June 13, 2013

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी … बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!! शुभकामनायें. बेह्तरीन अभिव्यक्ति

    krishnakant के द्वारा
    July 27, 2013

    शुक्रिया सर

aman kumar के द्वारा
March 11, 2013

कैसा जी यह लोकतंत्र है कैसा इसका मोह-मंत्र है हमको तो लगता है जैसे कुछ लोगों के लिए खून पीने का, सबसे सफल यन्त्र | लोकतंत्र का भारत का माडल जनमत को तुस्टीकरण से उल्लू बनाने का तंत्र है ! आपकी कविता अतिसुंदर ! दुष्यंत कुमार जी की याद आ गयी ! ……..

    krishnakant के द्वारा
    July 27, 2013

    बहुत बहुत आभार अमन जी

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 29, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी … बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!! शुभकामनायें. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    krishnakant के द्वारा
    December 14, 2012

    मदन जी, बहुत बहुत आभार आपका। आपके प्रोत्‍साहन से मुझे बल मिलेगा, परंतु नमन जैसे शब्‍द मुझे शर्मिंदा करेंगे। मैं बहुत ही मामूली आदमी हूं। बहुत शुक्रिया ा

avinashgaurav के द्वारा
September 23, 2012

बहुत खूब

    krishnakant के द्वारा
    December 14, 2012

    अविनाश जी, बहुत बहुत शुक्रिया

Ravinder kumar के द्वारा
June 19, 2012

कृष्णकान्त जी, नमस्कार, मित्र, तंत्र किसी भी व्यवस्था के लिए अनिवार्य है, चाहे हमारा शरीर हो, समाज हो या राष्ट्र हो. लेकिन यदि तंत्र के अंग बीमार हो जाएँ तो पूरा तंत्र कुतंत्र बन जाता है. आज यही स्थिति हमारे भारत की है. इस देश को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जो तंत्र बनाया गया, जिसके अंग हैं जनता, नेता, अधिकारी, कर्मचारी सभी लालच, स्वार्थ, अहंकार जैसे रोगों से ग्रस्त हो चुके हैं. जिसका एकदम सटीक अंकन आप ने कविता में किया है. बेहतरीन रचना, आपको शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    krishnakant के द्वारा
    June 27, 2012

    ji thik kaha. shukriya.

dineshaastik के द्वारा
June 16, 2012

कृष्णकान्त जी बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति…. एक  एक  शब्द  सटीक

    krishnakant के द्वारा
    June 27, 2012

    dinesh ji shukriya

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 6, 2012

कृष्णकांत जी बहुत सटीक, सत्य एवं सुन्दर रचना है आपकी….बहुत उम्दा मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है, कभी आइये और अपने विचारों से मेरा मार्गदर्शन करिए

    krishnakant के द्वारा
    June 27, 2012

    anil ji…shukriya


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