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गाँधी का नाती

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चिकना चुपड़ा लल्लू खुद को
गाँधी का नाती कहता है
गांव में आकर खुदको
हम सबका सच्चा साथी कहता है

जितने का घर-बार हमारा
उतने का तो कुरता उसका
दिल्ली और सीकरी उसकी
रोटी उसकी ज़र्दा उसका

हमने कहा कि महंगाई है
भकुआ चुप्पैचाप रहा
हम बोले कि घर नाहीं है
भकुआ चुप्पैचाप रहा
हम बोले गगरी खाली है
भकुआ चुप्पैचाप रहा
बस्ती का बच्चा-बच्चा है
ठण्ड-भूख से कांप रहा

कलावती से प्यार जताकर
कुछ बच्चों को गोद उठाकर
कई बार मेरे ही घर को
वह अपना घर-बार बता कर
चला गया है मूर्ख बनाकर
इसके सारे राज़ पता कर

कौन है यह अंग्रेज का बच्चा
सरपत को गन्ना कहता है
किस चक्कर में आता है यह
तरह-तरह चालें चलता है
अख़बारों में काहे इसका
बड़ा-बड़ा फोटू छपता है

आता है हर साल गांव में
खूब तमाशा करता है
सब बच्चों से रामराज का
झूठा वादा करता है
कहीं मुश्किलें सारी हमने
नहीं किसी पे कान दिया
अगले ही दिन अपना तम्बू
बगल गांव में तान दिया

आठ महीने से घर में
कोई भी सालन नहीं बना
कोदौ-किनकी नाहीं मयस्सर
कहाँ मिलेगा खीर-पना
कुछ-कुछ दिन पर भूख के मारे
कोई न कोई मरता है
आँख बंद है कान बंद है
और ज़मीर पर पर्दा है

अबकी आये टेन्ट लगाये
सारे बल्ली-बांस तोड़ दो
बंद करो यह नाटक अब
हम सबको अपने हाल छोड़ दो

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 5, 2012

पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

dineshaastik के द्वारा
March 30, 2012

श्रीकांत जी आपने सचमुच, बहुत ही तीखा व्यंग कसा, एक आम ग्रामीण के मुख से, व्यक्त कराई सही दशा, अपनी कमी न मालुम होती, हार न जाते अगर नहीं, कहाँ गये राहुल व दिग्गी, अब तो आते नजर नहीं।

    krishnakant के द्वारा
    March 30, 2012

    वाह दिनेश जी, आपने तो कविता की तारीफ कविता से की। अच्‍छा लगा। आपकी हौसला आफजाई हमें और लिखने को प्रेरित करेगी। आपका ब‍हुत शुक्रिया।

sanjay dixit के द्वारा
March 25, 2012

आपकी लेखनी की प्रतिबद्धता और इतने सटीकता से अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी ,बधाई

panditsameerkhan के द्वारा
March 22, 2012

कृष्णकांत जी आपने बहुत सटीक कविता लिखी है…..राहुल उर्फ़ पप्पू की हरकतों का सही varnan है…..बहुत खूब http://panditsameerkhan.jagranjunction.com

shaktisingh के द्वारा
February 28, 2012

राहुल की यह दास्तां बहुत ही सुंदर लगी


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